हर साल डायरिया लेता है 5 लाख से ज्यादा बच्चों की जान!

 

डायरिया

हर साल पूरे विश्व में बच्चों में डायरिया के 1.7 बिलियन से ज्यादा मामले सामने आते हैं। इतना ही नहीं हर साल 5 लाख 25 हजार से ज्यादा बच्चे इस बीमारी की चपेट में आकर अपनी जान गंवाते हैं। पूरे विश्व में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का दूसरा मुख्य कारण डायरिया ही है।

बढ़ रहे हैं डायरिया के मामले

सबसे ज्यादा चिंता की बात तो यह है कि हर साल डायरिया के मामले बढ़ रहे हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की एक रिपोर्ट में यह बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में 9% बच्चे डायरिया से पीड़ित पाये गये थे, जबकि साल 2020 तक ये आंकड़ा बढ़कर 9.2% तक पहुँच गया था। भारत में तो डायरिया प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बन चुका है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक भारत में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में मौत का तीसरा मुख्य कारण डायरिया है। (Ref)

डायरिया क्या होता है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक दिन में 3 या उससे ज्यादा बार बिल्कुल पतला या पानी जैसा मल होने की समस्या को डायरिया कहते हैं। एक बात का ध्यान रखें कि मल का बार-बार निकलना या स्तनपान करने वाले शिशुओं का ढीला व चिपचिपा मल त्याग करना दस्त नहीं कहलाता है।

डायरिया के प्रकार

डायरिया मुख्य रूप से 3 प्रकार का होता है - एक्यूट वाटरी डायरिया, एक्यूट ब्लडी डायरिया और परसिस्टेंट डायरिया।

1. एक्यूट वाटरी डायरिया

इसमें बिल्कुल पानी जैसा मल निकलता है और ये समस्या कुछ घंटों या दिनों तक बनी रह सकती है। 

2. एक्यूट ब्लडी डायरिया

इस परेशानी में मल में खून आने लगता है। इसे डिसेंट्री भी कहा जाता है। 

3. परसिस्टेंट डायरिया

जब 14 या उससे ज्यादा दिन बीत जाने के बाद भी दस्त की समस्या ठीक न हो, तो इसे परसिस्टेंट डायरिया कहते हैं।

क्यों डायरिया है खतरनाक?

डायरिया से होने वाले 2 मुख्य खतरे हैं- कुपोषण और मृत्यु। एक्यूट डायरिया से मौत होने का प्रमुख कारण है शरीर से ज्यादा मात्रा में पानी और नमक का बाहर निकल जाना। इस स्थिति को डिहाईड्रेशन कहा जाता है। वहीं डिसेंट्री में आंतों को क्षति, सिस्टमेटिक इंफ्केशन एवं कुपोषण के कारण मरीज की मौत हो सकती है।

बच्चों को डायरिया होने के क्या कारण हैं?

1. संक्रमण

डायरिया कई जीवाणु, वायरस और परजीवी जीवों के कारण होने वाले संक्रमण का एक लक्षण है। ये बीमारी मुख्य रूप से दूषित पानी के कारण फैलती है। जिन जगहों पर साफ-सफाई का अभाव होता है, वहाँ डायरिया फैलने का खतरा ज्यादा रहता है।

2. रोटा वायरस

बच्चों में डायरिया होने के कारणों में रोटावायरस भी प्रमुख है। 2 साल से कम उम्र के बच्चों को यह वायरस सबसे ज्यादा प्रभावित करता है।

3. गलत खानपान

कई बार कुछ खाने की चीजों से एलर्जी होने के कारण बच्चे डायरिया का शिकार हो जाते हैं।

4. दवाईयों के साइड इफेक्ट्स

अक्सर कुछ दवाईयों के साइड इफेक्ट्स के कारण भी बच्चे डायरिया की चपेट में आ जाते हैं।

बच्चों में गंभीर डायरिया के लक्षण क्या हैं?

इस बारे में बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ. अंबुज त्रिपाठी बताते हैं कि कई बार बच्चों में डायरिया गंभीर रूप ले लेता है। ऐसे में बच्चे का सुस्त पड़ जाना, कुछ भी न खा पाना, कुछ खाते ही उल्टी कर देना, लगातार पानी जैसा दस्त होना, 6-8 घंटे तक बच्चे का पेशाब नहीं करना व अन्य लक्षण नजर आते हैं। इन परिस्थितियों में बिना देरी किये बच्चे को निकटवर्ती अस्पताल ले जाना चाहिये ताकि समय रहते उसका इलाज हो सके। 

डायरिया का घरेलू उपचार

डायरिया में शरीर से ज्यादा मात्रा में पानी निकलने से बच्चे को डिहाईड्रेशन हो सकता है। इसीलिए, बच्चे के शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित रखना बहुत ज्यादा जरूरी होता है। इसका सबसे बेहतर इलाज है ओआरएस। इसके अलावा ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ जैसे सूप, चावल का पानी एवं सादा पानी बच्चे को दिया जाना आवश्यक है। यदि बच्चे की उम्र 6 महीने से कम हो, तो उसे ओआरएस का घोल या पानी देना चाहिए। इससे बच्चे के शरीर में पानी की कमी नहीं होती है।

डायरिया से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स

  • सफाई का ध्यान रखें। बच्चे की हाइजीन पर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है।
  • बच्चे को हमेशा स्वच्छ पानी पिलाएं। 
  • खाना खाने से पहले हमेशा बच्चे के हाथ धुलवाएं ताकि किसी तरह की गंदगी उसके मुँह में न जाए। 
  • जन्म के बाद 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ स्तन करवाएं, इससे बच्चे में डायरिया का जोखिम कम हो सकता है।
  • बच्चे को रोटावायरस वैक्सीन लगाना भी जरूरी है। इससे डायरिया के खतरे को टाला जा सकता है। 
  • बच्चे के हाईड्रेशन का भी विशेष ध्यान रखें।

डायरिया से पीड़ित बच्चे को क्या आहार देना चाहिए?

बच्चे के आहार में अनावश्यक कटौती करने से उनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इसका असर बच्चे के विकास पर पड़ सकता है और बच्चा कमजोर हो सकता है। इसीलिए, दस्त के दौरान या उसके बाद दूध या भोजन का सेवन प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए। डायरिया होने पर अगर बच्चे का खानपान ठीक रहेगा, तो वो जल्दी ठीक हो सकेगा और उसका वजन भी बढ़ेगा। डायरिया के दौरान निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है-
  1. बच्चे को ऐसा भोजन खिलाएं जो आसानी से पच जाये और एक बार में न खिलाकर बच्चे को थोड़ी-छोड़ी देर में कुछ न कुछ खिलाते रहें।
  2. डायरिया होने पर भी बच्चे को स्तनपान कराना जारी रखें।
  3. स्तनपान के अलावा बच्चे को चावल का मांड, दाल का पानी या दलिया जैसी चीजें खिलायी जा सकती हैं।
  4. जब-जब बच्चे को दस्त लगे, तब उनके भोजन की मात्रा सामान्य से थोड़ा बढ़ा दें। ऐसा तब तक करें, जब तक डायरिया ठीक न हो जाये और बच्चा अपने मूल वजन पर वापस न आ जाये।

निष्कर्ष (Conclusion)

एक बात ध्यान में रखें कि डायरिया एक जानलेवा बीमारी है, इसीलिए इसे कभी भी नजरअंदाज करने की गलती न करें। हमेशा अपने बच्चे को इस बीमारी से बचाने की कोशिश करें। वहीं जिन बच्चों को डायरिया हो चुका है, उनका विशेष ध्यान रखें और कोई भी परेशानी होने पर तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें।

Reference

1. WHO, 2017. Diarrhoeal disease Available at:

2. Ghosh, K., Chakraborty, A.S. and Mog, M., 2021. Prevalence of diarrhea among under five children in India and its contextual determinants: A geo-spatial analysis. Clinical Epidemiology and Global Health, 12, p.100813

3. WHO, 1993. The Management and Prevention of Diarrhoea Available at: (Accessed: 30 August 2023).

4. IAP, 2021. Guidelines for Parents: Diarrhea Available at

5. Tripathi, A., 2023.बच्चों में दस्त (diarrhoea) के लक्षण (2023). Available at: (Accessed: 30 August 2023).


FAQ

  बच्चों में गंभीर डायरिया के लक्षण क्या-क्या हैं?  
   

बच्चे का सुस्त पड़ जाना, कुछ भी न खाना पाना, कुछ खाते ही उल्टी कर देना, लगातार पानी जैसा दस्त होना, 6-8 घंटे तक बच्चे का पेशाब नहीं करना व अन्य गंभीर डायरिया के लक्षण हैं।

 
  डायरिया कितने प्रकार का होता है?  
   

डायरिया मुख्य रूप से 3 प्रकार का होता है - एक्यूट वाटरी डायरिया, एक्यूट ब्लडी डायरिया और परसिस्टेंट डायरिया।

 

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